प्राणिविज्ञान में पीएच.डी.
शोध-प्रबंधThe migratory pattern and identification of habitat patches with nesting success of Merops philippinus
भारत के गंगा डेल्टा की कृषिभूमि में नीली-पूँछ पतरिंगा (Merops philippinus) गर्मियों में प्रजनन के लिए घोंसला बनाता है। कृषिभूमि के क्षरण को रोकने के लिए किसान नदी के कगारों को कंक्रीट से बाँधना चाहते हैं — किंतु यह अवसंरचना पक्षियों के प्राकृतिक पर्यावास को नष्ट करती है और प्राकृतिक कीट-नियंत्रण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समाप्त कर देती है। मेरे शोध ने पहचाना कि कंक्रीटीकरण के दौरान प्रजनन काल में पक्षी-आबादी बनाए रखने के लिए पर्यावास गलियारों को कहाँ संरक्षित रखना आवश्यक है — जलवायु, मिट्टी, कीट और जलीय पूर्वानुमानकों को पक्षियों के घोंसला-निर्माण, प्रजनन सफलता और जनसांख्यिकीय चरों के साथ प्रच्छन्न और प्रतिक्रिया चरों के रूप में एकीकृत करते हुए, प्रक्रिया-आधारित और मशीन-लर्निंग मॉडलों के संकर संयोजन से।
पर्यवेक्षक
Prof. Sabyasachi Bhattacharya
Agricultural & Ecological Research Unit, Indian Statistical Institute, कोलकाता
Prof. Santanu Ray
Department of Zoology, Visva-Bharati University (अप्रैल 2022 में सेवानिवृत्त)
वित्तपोषण
Council of Scientific and Industrial Research (CSIR)
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार
JRF (2017, 2018) · SRF (2020)